
जानिए आपकी जन्म कुंडली में संतान नाशक योग एंव उपाय ---
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प्रिय
पाठकों/मित्रों वंशवृद्धि की बेल को बढ़ाने के लिए वृद्धावस्था में देखभाल
एंव पुत्र द्वारा अंतिम संस्कार करने से मुक्ति संतान सुख के लिए संतति
होना आवश्यक ही नही बल्कि अनिवार्य भी है । कुछ जातको को षादी के कुछ समय
पश्चात् ही संतति सुख प्राप्त हो जाता है तो कुछ जातको को कई वर्श व्यतीत
होने के पष्चात एंव कुछ जातक आजीवन सुख से वछिंत रहते है । विज्ञान की
प्रगति के फलस्वरूप कुछ जातको को संतान सुख कृत्रिम गर्भाधान द्वारा सुख
प्राप्त हो भी जाता है लेकिन प्रबल बाधा होने पर सुख मिलना असम्भव ही रहता
है ।
हमारे ज्योतिष ग्रंथों में पुत्रदिवमहीशपुत्रपितृधीपुण्या नि
सचितयेत के अनुसार पंचम भाव सतांन सुख का प्रतिनिधत्व करता है| कारक ग्रहो
में बृह. को संतान सुख कारक माना जाता है । संतान सुख हेतु पंचमेष व बृह.
को बलवान होना एंव पंचम भाव पर कारको पर शुभ ग्रहो का अधिक प्रभाव संतान
सुख अवश्य देता है लेकिन इन कारको पर शुभ ग्रहो का अधिक प्रभाव संतान सुख
अवश्य देता है , लेकिन इन कारको पर पाप ग्रहो का प्रभाव , कारको की नीच
नवांष , शडबलहीन , शत्रु राशि , अस्तगत स्थिति संतान सुख में बाधा कारक
होती है बाधा कारक योगो की पहचान कर उनका उपाय करने पर संतान सुख प्राप्त
हो जाता है , संतान प्रतिबंध के योग एव उपाय -
1.
शनि की अधिश्ठित राशि से शश्ठ स्थान पर यदि चन्द्र , बुध व सूर्य की
दृश्टि हो व लग्न पर पाप ग्रह की दृश्टि हो या शनि की राशि में लग्न रथ हो
तो कुल देवता के दोश के कारण जातक संतानहीन होता है से नियमित कर साथ ही
पंचमेष व बृह. का उपाय करने से संतान सुख प्राप्त हो जाता है ।
2.
यदि पंचम भाव, पंचमेष व कारक बृह. पर राहु का अशुभ प्रभाव हो तो जातक को
सर्प हत्या जनित दोश के कराण संतानहीनता होती है । दोश , निवारण हेतु
स्वर्ण निर्मित नागराज की मूर्ति की पूजा करे एंव योगदान , तिलदान व
स्वर्णदान कर ऊ नमोस्तु सर्वेभ्यो । मंत्र का दस हजार जाप करने से नागराज
की कृपा से वषं चलता है ।
3. यदि
पितृकारक सूर्य, सिंह राशि व दशमेष , दशम भाव पर पाप ग्रहो का प्रभाव हो या
ये निर्बल हो , त्रिक भावो में स्थित होतो पितृशाप के कारण संतान बाधा
होती है , बाधा निवारण हेतु पितृदोश षान्ति करवाए । गाय श्राद्ध कर
कन्यादान , गोदान करने से संतान बाधा दूर हो जाती है । सुर्य को अर्ध्य
देने से भी राह मिलती है ।
4. यदि
मातृकारक चन्द्रं, कर्क राशि एंव चतुर्थ भाव पर पापग्रहो का प्रभाव हो ,
कर्क राशि में मंगल राहु स्थित हो , चन्द्रं अपनी नीच राशि नीच नवांष या
त्रिक भावो में स्थित हो तो मातृदोश के कारण संतान बाधा होती है । बाधा
निवारण हेतु समुद्र तट पर स्नान करना , गायत्री मंत्र के 1 लाख जाप चांदी
के पात्र में दुध का सेवन करना लाभदायक एंव पीपल की परिक्रमा करने से दोश
दुर होकर संतान सुख प्राप्त होता है ।
5.
तृतीय भाव, तृतीमेष व मंगल पंचमेष या बृह के साथ त्रिक भावो में होतो
भातृशाप के कारण संतान होती है । हरिवंष पुराण का श्रवण , चान्द्रायण व्रत
करने पीपल रोपण कर पूजा करने से संतान सुख होता है ।
6.
पंचम भाव पंचमेष व कारक बृह. पर बुध का अशुभ प्रभाव हो एंव इन पर शनि राहु
केतु का प्रभाव भी पड़ता दिखे तो मातुल शाप के कारण संतान बाधा पैदा होती
है इस हेतु विष्णु प्रतिमा स्थापना पुजन करना, परोपकारार्था कुआं , बावड़ी ,
तालाब , खुदाई एंव छात्रो को विद्यालयी सामग्री का दान करने से शाप निवारण
होकर संतान सुख प्राप्त होता है ।
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यदि पंचमेष या नवमेष होकर बृह. शनि राहु केतु मंगल के प्रभाव में या त्रिक
भाव में होकर निर्बल भी होतो ब्राम्हण शाप के कारण संतान बाधा होती है ।
निवारण हेतु कन्यादान , गरीब ब्राम्हण का सहयोग , स्वर्ण पुखराज दान ,
धर्मस्थान में पीले फल वितरण करने से संतान सुख प्राप्त होता है ।
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संतान बाधा कारक ग्रहो के अनुसार उपाय करना यथा बुध , शुक्र व चंन्द्र दोश
कारक होतो रूद्राभिशेक , बृह. बाधाधारक होतो मंत्र, यंत्र व औशध, सुर्य,
मंगल, शनि, राहु, व केतु के लिए कुलदेवता की उपासना करने से बाधा दुर होती
है ऐसा जातकालंकार का मत है मंत्र हेतु बृह. यंत्र , पुखराज धारण करना
सर्वात्तम उपाय है ।
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